traveling
Billund से वियना की फ्लाइट सस्ती मिली तो मैंने अपना ट्रिप प्लान कर लिया और जब मैं आरहुस से Billund पहुँची तो पता चला कि फ्लाइट लगभग डेढ़ घंटा लेट है मैंने सोचा अब क्या किया जाये तो मैंने सोचा क्यों ना चलकर यहाँ की दुकाने देखी जायें। मैंने अपना बैग उठाया और पहुँच गई देखने के लिए मैंने पूरा एयरपोर्ट का चप्पा-चप्पा छान मारा और जब मैं वाइन और बीयर वाली शॉप पर पहुँची तो उसको देखकर मुझें बहुत अच्छा लगा मैंने यहाँ आने के बाद इतनी सुंदर-सुंदर बोतल और इतने डिफ़रेंट नाम की वाइन और बियर देखी है।
बहरहाल मैं जब एक स्टोर में पहुँची तो सोचा चल कुछ खा लेते हैं यहाँ ज़्यादातर चीज़ें डिजिटली ही ऑर्डर करनी पड़ती है और बाद में आपका नंबर आये तो काउंटर से लेना होता है। मैंने कुछ ऑर्डर किया और अपने नंबर का इंतज़ार करने लगी तो मुझें समझ ही ना आये क्योंकि उसमें नंबर कुछ तो आगे पीछे था। मैं बड़ी देर तक बोर्ड पढ़ती रही और उधर वो लड़की 4 बार मेरा नंबर डेनिश में चिल्ला चुकी थी। मैं समझने की कोशिश तो कर रही थी लेकिन समझ नहीं आया था अब तक , मैंने देखा कि काफ़ी समय से कुछ तो काउंटर पे रखा है मैं गई और पूछा कि 65 नंबर उसने कहा कितनी बार बुलाया आपको मैंने बोला तो इंगलिश में ही बोल देती चाची इसके चक्कर में पता चले फ्लाइट छूट जाती तो, ख़ैर खा पीकर आराम से आकर फ्लाइट ली और वियना की तरफ़ प्रस्थान की जब भी मैं फ्लाइट में बैठती हूँ तो मुझें अंदर से अजीब सी घबराहट होती है जब फ्लाइट टेक ऑफ करती है ना तो मैं चिल्लाने लगती हूँ लेकिन ख़ुद में ही चिल्लाती हूँ किसी और को सुनाई नहीं देता है वो चिल्लाना मेरा और जब ऊपर से नीचे देखती हूँ तो सारा डर ख़त्म हो जाता है मुझें लगता है आसमान,चाँद,तारे,हवायें और बारिश की बूँदे सब मेरे अपने है और मैं उनसे घंटों बातें करते हुए उस यात्रा के संपन्न ना होने की कामना करती हूँ लेकिन हर चीज़ जो हम सोचे वो हो जाये ऐसा हमेशा संभव नहीं है।
मैं सबसे ज़्यादा खुश फ्लाइट में ही होती हूँ। मुझें लगता है कि मैं आसमाँ तक उड़ने के लिए ही बनी हूँ। अपनी तारीफ़ आज ज़्यादा ही हो गई है लेकिन कर लेनी चाहिए ख़ुद कि तारीफ़ भी कभी-कभी मैंने जैसे ही वियना में पैर रखा वहाँ बारिश शुरू हो गई मानो इंद्र देवता मुझें देखकर ख़ुश हो गये थे।
यहाँ से थोड़ा मुश्किल शुरू हुई मैं जब वियना के बस ट्रेन और मेट्रो काफ़ी कन्फ्यूज़िंग हैं मैंने सोचा था सब आराम से कर लूँगी लेकिन नहीं मैंने टिकट मशीन से टिकट ली और अब ऑनलाइन सब देखा कैसे जाना है लेकिन फिर भी प्लेटफार्म क्लियर नहीं हो रहा था किसी से पूछा तो उन्होंने 2 बार इधर उधर बताया फिर मैंने वहाँ खड़े ट्रेन ड्राइवर से पूछा तो उसने मुझे बताया सही रास्ता और मैं ट्रेन में चढ़ गई लेकिन अगले 2 स्टैंड बाद मैंने एक पास में खड़ी लड़की से पूछा कि मैं सही जा रही हूँ तो उसने अपने बॉयफ़्रेंड को कुछ बोला उस लड़के ने मेरा फ़ोन लिया और देखना शुरू किया उसको ख़ुद कुछ समझ में नहीं आया तो पास में खड़े एक नाइजीरिया के लड़के ने मेरा फ़ोन लिया और अपने एक दोस्त को कॉल करके अपनी भाषा में बात करके पूछा फिर मुझे बोला यहीं उतर जाओ आओ मेरे साथ मेरा दोस्त आ रहा है वो जानता है, सब टूटी-फूटी अंग्रेज़ी में बेचारे ने मुझे बहुत समझाया मैंने भी उसकी एक्टिंग देख कर जितना उसका सपोर्ट हो सकता था की तभी उसका दोस्त आया अब वो दोनों मेरी मदद करने में जी-जान लगा रहे थे उनको समझ नहीं आ रहा था कि, वो मुझे किस भाषा में बताएँ बहुत जद्दोज़हद के बाद उनको एक आईडिया आया और मेरा हाथ पकड़ कर वो मुझे मैप के पास लेकर गया और उसने ऊ ट्रेन ऊ ट्रेन करने लगा मैंने कहा यू ट्रेन बोलता है नहीं ऊ ट्रेन उसने कहने का मतलब यू ही था लेकिन यू को ऊ बोल रहा था।
मैंने बोला समझ गई फिर मैंने मैप की फोटो खिची और उनको धन्यवाद कहा और अपने रास्ते निकल पड़ी उन दोनों लड़कों के मेहनत के बारें में मैंने सोचा क्योंकि उसके पहले जिन लोगों से पूछा था उन्होंने बस देखा और उसको बस एक फ़ॉर्मेल्टी के तौर पे हाँ ना कर दिया था। कभी-कभी भाषा अगर नहीं भी होती है और अगर कोई मेहनत करके किसी को कुछ बताना या समझाना चाहता है तो वो भी समझा जा सकता है।
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