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Showing posts from November, 2022

Wardha

जब वर्धा में पैर रखा था तब ये बिलकुल एहसास नही था की वर्धा से मोहब्बत भी हो सकती है और होता भी क्यों वहाँ की वादियाँ जब मन को लुभाती हैं तो सब कुछ अच्छा लगता है. जब वही अपने असली रूप में आ जाती हैं तो एकदम निरसता से भर जातीं हैं। इसके बावजूद भी शाम में जब गर्मी को गर्मी काटती है ये बात सच दिखती थी तो एकदम चेहरे पर मुस्कान खिल जाती थी।  वर्धा में चाहे दिन धूप में क्यों ना बीता हो लेकिन शाम का आनंद लेने के लिए दीपू की दुकान पर जब बैठकर घंटों बकवास बाज़ी करके बीता देते थे तो वो दिन पूरा बेहतर वाले दिन में गिना जाने लगता था। शायद यह दीपू के चाय का ही असर होगा जो लोगों में इतनी ऊर्जा भर देता था और कुछ लोग तो सिर्फ़ वहाँ यह देखने के लिए बैठे होते थे की आज कौन कौन आएगा किसका किसका मामला सेट होगा कौन किसके साथ है और कुछ ऐसे भी आशिक़ देखे मैंने जो सिर्फ़ घंटों बैठ कर किसी एक का इंतज़ार करते और उसके दर्शन पाकर खुद को धन्य समझते ऐसा लगता था देवी मैया बड़ी मनौती के बाद उसको भेजी हैं। वर्धा जैसे छोटी जंग में इतने प्यारे लोगों का होना इस बात का सबूत है कि जगह इंसानो से ही बनती है वर्धा के लोकल ल...

बदलाव

 अंतर  गावों में पढ़ाई का माहौल एकदम अलग है। गाँव  में लोग एक दूसरे से आगे निकलने की होड़ में लगातार लगे हुए हैं आए दिन घर पर माँ - पिता जी चिल्लाते हैं की पढ़ ले नही तो कुछ होगा नही गोबर उठाएगा घर पर वो देख फलाने का बेटा / बेटी कितना आगे बढ़ रहा  है और तू है की कुछ समझती ही नही  इस तरह के ताने सुनकर हम सभी बड़े हुए हैं। कभी कभी इतनी झल्लाहट होती थी कि  मन होता था कि  घर से भाग जाओ और दोबारा मत वापस आओ क्योंकि  उस वक्त हम सिर्फ़ अपने मनोरंजन के लिए स्कूल जाते थे  और हवाबाज़ी में रहते थे और सोचते थे कि अरे! पास तो हो जाएँगे। इसको आप लापरवाही कह सकते हैं। क्यूँकि हमको शिक्षा की अहमियत तब तक नही पता  थी। कई बार तो स्कूल जाने के लिए पीते भी गये  हैं। सबसे बड़ी परेशानी मेरा भाई था। हम दोनो एक हाई स्कूल में पढ़ते थे वो उस समय मेरा सबसे बड़ी दुश्मन हुआ करता था क्योंकि  जो भी स्कूल  में होता सब का लाईव- टेलीकास्ट  वो घर पर आकर करता था. फिर क्या लात -मुक्का और ताने सुनने ही पड़ते थे। कभी-कभी तो बिन मौसम बरसात हो जाती थी मुक्को...

नेलपॉलिश

नेलपॉलिश पर अधिकार किसका है ? क्या आप मुझें बता सकते हैं? साड़ी, स्कर्ट टॉप, लिपस्टिक पर अधिकार किसका क्या आप मुझें बता सकते हैं ?   हाँ! शायद आप बता सकते हैं क्योंकि आपने यह तय किया हुआ है. आपने यह सिस्टम बनाया हुआ है। क्योंकि समाज के ठेकेदार तो आप ही हैं ना ?  बहरहाल आपसे उम्मीद भी क्या की जा सकती है इसके अलावा , ख़ैर! सुनिए ये चीज़ें आप जिसके लिए सोच रहें हैं ना , आपके अनुसार वो दरअसल लड़की के लिए बनी है। लेकिन यहाँ गुरु सिस्टम एकदम आपकी ऐसी तैसी कर देगा समझे आप ?  नहीं समझे! तो सुनिए "ई जो तोहार सिस्टम है ना मर्द अऊर औरत वाला पहिले तो एकर फाईल निकार के एहमें आग लगावा" बड़ी अजीब विडंबना है समाज के ढांचे की अऊर ई हमरो मन में बचपने से जउन चिप फिट रहल है उ बड़ा बवाली है रे बाबा! इहा आवे के बाद सारा सिस्टमें हैंग कर गया एकदम सब लुल्ल हो गया है। कितना भ्रम है संसार में कितने कायदे हैं। यहाँ की संस्कृति एकदम अलग है ,आजकल मैं लगातार इस प्रश्न के कटघरे में ख़ुद को खड़ा पा रही हूँ हर दूसरे दिन की नेलपॉलिश ये लड़का क्यों लगाया है? क्या ये गेय है ? मुझें ये बातें हर दूसरे दिन सुनने क...

पीरियड्स

शरीर में बदलाव जब आने लगता है. तभी से पीरियड की शुरुआत होती है। कुछ लड़कियों को जल्दी ही पीरियड शुरू हो जाते है कुछ लड़कियों को बाद में शुरू होते हैं। क्योंकि शिक्षा के आभाव की वज़ह से लड़कियां यह समझ ही नहीं पाती की आखिर यह क्या हो रहा है।  मुझें याद है आज भी वो दिन जब पहली बार मेरा पीरियड शुरू हुआ था. मैंने सफेद स्कर्ट और टॉप पहना था उस दिन और तब मैं दसवीं में पढ़ रही थी अचानक मेरी एक दोस्त ने आकर मुझसे कहा कि तू आज कक्षा लेने नहीं जायेगी। क्योंकि लड़कियों को कक्षा पढ़ने के लिए लड़कों के विंग में जाना पड़ता था। मैंने सोचा यह मजाक कर रही है. मैं तो जा रही हूँ।  तब उसने मुझें जोर से हाथ पकड़ कर खींचा और कहा तू वाशरूम जा मैं आती हूँ। उस वक्त तक मुझें नही पता था कि मेरी दोस्त ऐसा क्यों बोल रही है। मैं गुस्से में वाशरूम में गयी और उसके बाद मैंने अपने सफेद स्कर्ट पर लाल निशान देखा और मैं वहीं खड़ी होकर रोने लगी. हे भगवान! ये क्या हो गया मेरे साथ क्योंकि उस वक्त तक मुझें पीरियड्स के बारें में कुछ भी नहीं पता था। मेरी दोस्त पूरे रास्ते मुझें समझाती और चुप कराती हुए घर तक लेकर आई। और मैं शर्म क...