पीरियड्स
शरीर में बदलाव जब आने लगता है. तभी से पीरियड की शुरुआत होती है। कुछ लड़कियों को जल्दी ही पीरियड शुरू हो जाते है कुछ लड़कियों को बाद में शुरू होते हैं। क्योंकि शिक्षा के आभाव की वज़ह से लड़कियां यह समझ ही नहीं पाती की आखिर यह क्या हो रहा है।
मुझें याद है आज भी वो दिन जब पहली बार मेरा पीरियड शुरू हुआ था. मैंने सफेद स्कर्ट और टॉप पहना था उस दिन और तब मैं दसवीं में पढ़ रही थी अचानक मेरी एक दोस्त ने आकर मुझसे कहा कि तू आज कक्षा लेने नहीं जायेगी। क्योंकि लड़कियों को कक्षा पढ़ने के लिए लड़कों के विंग में जाना पड़ता था। मैंने सोचा यह मजाक कर रही है. मैं तो जा रही हूँ।
तब उसने मुझें जोर से हाथ पकड़ कर खींचा और कहा तू वाशरूम जा मैं आती हूँ। उस वक्त तक मुझें नही पता था कि मेरी दोस्त ऐसा क्यों बोल रही है। मैं गुस्से में वाशरूम में गयी और उसके बाद मैंने अपने सफेद स्कर्ट पर लाल निशान देखा और मैं वहीं खड़ी होकर रोने लगी. हे भगवान! ये क्या हो गया मेरे साथ क्योंकि उस वक्त तक मुझें पीरियड्स के बारें में कुछ भी नहीं पता था। मेरी दोस्त पूरे रास्ते मुझें समझाती और चुप कराती हुए घर तक लेकर आई। और मैं शर्म के मारे 2 दिन स्कूल नहीं गयी क्योंकि लगभग सभी लड़कियों ने मुझें देखा था इसलिए हिम्मत ही नहीं कर पाई जाने की।
उस दिन मुझें ये एहसास हुआ कि इसके बारें में बात होनी चाहिए और हर लड़की को अपने शरीर में हो रहे बदलाव के बारें में जानकारी होनी चाहिए।
इस पूरी कहानी का तात्पर्य सिर्फ़ इतना ही है कि जब कोई स्त्री पीरियड्स में हो तो अगर आप कुछ नही कर सकते तो उसके साथ रहिए क्योंकि मज़ाक बना देना आसान है कि लड़कियों के मूड स्विंग होते है वो तो फ़ालतू ऐसे हरकतें करती है। लेकिन जिस दिन आप उस स्थिति में ख़ुद को रख कर देखेंगे उस दिन आपको एहसास होगा कि, असल में क्या स्थिति रहती है लड़कियों की जब कमर ,पेट पूरे शरीर में दर्द उठता है और वह चाह कर भी बेड से उठ नहीं पाती है। लेकिन फ़िर भी वो इतनी सक्षम ख़ुद को बनाती है कि वो ख़ुद उठकर अपने काम करके और आपको भी ख़ुश रखने की लगातार कोशिश करती है। इसलिए स्त्री को भगवान ने इतना सहनशील बनाया है क्योंकि उनको पता है कि सिर्फ़ वही है जो इतना सब कुछ झेल कर मुस्कुरा लेती है। बिना किसी शिकायत के वो आगे बढ़ जाती है।
©स्वधा त्रिपाठी
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