लिखना और पढ़ना
आप किस किस दौर से कब कहाँ कैसे गुजर रहें है, ये सिर्फ़ आप जानते है। मानसिक, शारिरिक रूप से आप कितने आहत या यूँ कह लो कितने ख़ुश है ये सिर्फ़ आपको पता है। और मीडिया दिखावे के सस्ता और अच्छा माध्यम है, यहाँ जो सच है ,वो तो है ही जो सच नही है वो भी सच से ज्यादा हमको लगने लगता है। मीडिया का इतना असर है कि हम अपनी ज़िंदगी के कुछ घण्टे भी बिना मीडिया के बिता पाएँ ये बड़ा मुश्किल सा लगता है। कलम का स्तर नीचे हो गया है आजकल हम लोग सब कुछ टाइपिंग से कर ले रहे है। हमको ज़रूरत ही नही लग रही है कलम की कुछ लोग ऐसे भी है जिन्होंने अपने बारहवीं की परिक्षा के दौरान कलम पकड़ी थी। क्योंकि अब सब कुछ डिजिटल हो गया है तो उनको महसूस ही नही होता कि उनके पास किसी चीज़ की कमी है। मैं ये सब आपको इसलिए बता रही हूँ कि कभी - कभी हम इतने आदि हो जाते है किसी चीज़ के की फिर हमारी वो आदत हमें एकदम जमीन पर लाकर छोड़ देती है।
कलम अपना काम करना छोड़ देती है, किताबे मुख मोड़ लेती है। इसलिए जरूरी है कि हम चीज़ों में तारतम्यता बनाये रखें।
स्वधा त्रिपाठी
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